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स्पिक मैके

स्पिक मैके युवकों में भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए गैर लाभकारी, स्वैच्छिक और अराजनैतिक एवं प्रतिभागी युवा आन्दोलन की सोसायटी है । भारत के शास्त्रीय संगीत की धरोहर के प्रसार एवं संवर्धन के माध्यम से एवं भारतीय शास्त्रीय कला के लालित्य को विशेष कर निष्पादन कलाओं के माध्यम से शिक्षा को समृद्ध बनाने के लिए इसका उद्देश्य आयोजनों, कार्यशालाओं एवं भारत के शास्त्रीय संगीत एवं कला पर पूरे वर्ष ब्याख्यान आयोजित करके सद्भावना निर्मित करना है ।

स्पिक मैके इस समृद्धि एवं विविध सांस्कृतिक ताने-बाने को इस देश के युवकों में शास्त्रीय कलाओं के माध्यम से और उनके उपाख्यानों, कर्मकांडों, पौराणिक कथाओं एवं दर्शन के साथ एवं उनके गहरे एवं सूक्ष्म मूल्यों की जागरुकता निर्मित करने में सहायक होता है ।

हालांकि इस आंदोलन का छद्म विषय कई तरह का हो सकता है। जैसे-वास्तविक स्वैच्छिक सद्भावना में सेवा भाव, अपनी खुद की संस्कृति का संरक्षक होना एवं कलाआें में पिरोए हुए सूक्ष्म मूल्य । यह आंदोलन युवा विद्यार्थियों से अपील करता है ऐसे लगता है कि यह विद्यालय एवं महाविद्यालय में संरचनात्मक वर्षो का मूल्य निर्मित करता है ।

स्पिक मैके @ नीटी

स्पिक मैके पं.विश्व मोहन भटृट द्वारा मोहन वीना समारोह के साथ वर्ष २००२ में नीटी में गौरवशाली रुप में शुरु हुआ था । तब से इसने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा । नीटी मुंबई स्पिक मैके अध्याय के सबसे सक्रिय सदस्यों में से एक है और इसे स्पिक मैके मुंबई द्वारा आयोजित विरासत एवं समारोहो की वार्षिक श्रृंखलाओं का उत्सव आयोजित करने का विकल्प दिया जाता है ।

पदमा तलवरकर (बांसुरी), नयन घोष (सितार) सुल्तान खान (सारंगी), राजा काले (बांसुरी), सोनल मान सिंह (ओ डी सी) उस्ताद अब्दुल हमीद जाफर खान, पं. बुद्धदेव दास गुप्ता (सरोद),  श्री आदित्य कल्यानपुर (तबला) एवं रुपक कुलकर्णी (बांसुरी), कुछ ऐसे कलाकार है जिन्हें नीटी में समारोह में भाग लेने का अवसर मिला ।

समारोहों के अलावा स्पिक मैके ,नीटी भारतीय संस्कृति के प्रति नीटी समुदाय के सदस्यों में व्यापक जागरुकता निर्मित करने के उद्देश्य से अनेक सांस्कृतिक आयोजन करती है जैसे- चित्रकारी स्पर्धा, कविता वाचन, प्रश्न मंच एवं सिनेमा ।

स्पिक मैके  वेबसाइट