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समीक्षा

समीक्षा का विचार इसलिए आया क्योंकि उद्योग एवं शैक्षणिक समुदाय के  बीच परस्पर बातचीत के लिए आवश्यकता महसूस की जा रही थी जिससे नयी सहस्त्राब्दि में व्यवसाय का स्वरुप क्या यह ज्ञात होगा । यह उद्योग एवं प्रबंधन के विद्यार्थियों के बीच बेहतर संचार के माध्यम से सिद्धांत एवं चलन के एकीकरण की ओर एक कदम है ।

समीक्षा श्रृंखला में प्रबंधन के सभी क्षेत्रों जैसे-विपणन, वित्त पोषण, मानव संसाधन प्रबंधन, परिचालन, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन एवं सूचना प्रौद्योगिकी को व्यापक रुप से कवर किया गया है । निगम के महारथियों द्वारा ज्ञान के आदान-प्रदान से विद्यार्थियों को अपने अध्ययन प्रक्रिया के क्षितिज के विस्तार में सहायक होता है । हमने ''अगली सहस्त्राब्दि के लिए रणनीतियॉ'' समीक्षा श्रृंखला के साथ एक विनम्र शुरुआत की है जिसके अंतर्गत १० नामिका परिचर्चाएं आयोजित की गईं । इस श्रृंखला की पूर्व नामिका परिचर्चाओं को विद्यार्थियों एवं कॉर्पोरेट सेक्टर से व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ । इन परिचर्चाओं के कुछ विषय वस्तु  निम्न थे :

१.      आगे आने वाले अस्पष्ट समय के लिए विपणन रणनीतियॉ ।

२.     प्रबंधन परामर्श : अध्ययन के मोड़ पर ।

३.     वित्तीय विचौलिए - आमूल परिवर्तन की ओर कटिबद्ध ।

४.     लॉजिस्टिक : कॉर्पोरेट के तरकश का नया तीर ।

५.     ई - मूल्यांकन : सही, उचित सम्मान ।

६.     बी पी ओ : व्यापक सुनिश्चित अवसर ।

७.     सेवाआें का विपणन ।

८.     एस सी एम : प्रतिस्पर्धी बाजारों में बने रहना ।

वर्तमान विषय वस्तु -''सहस्त्राब्दि से आगे की सोच'' उन बलों पर संकेंद्रित है जो भविष्य के व्यवसाय को आकार देने में दिलचस्पी लेते हैं । व्यावसायिक वातावरण में एक मौलिक परिवर्तन हुआ है । ग्राहक संकेंद्रित प्रचालन, दूरदर्शिता एवं सुलभकार के रुप में सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग नए उदाहरण हैं । इससे कंपनियॉ अपनी रणनीतियों का पूनर्मूल्यांकन करती हैं और   भूमंडलीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए उद्योग की सर्वोत्तम चलन अपनाती है । पहले की गौरवशाली परंपराओं को जारी रखते हुए समीक्षा १८ अगस्त, २००६ समीक्षा का एक अन्य संस्करण था । इस समय विषय ''भारत में रिटेल - प्रपत्र एवं रणनीतियॉ'' था । हमेशा की तरह हमारे यहॉ विशिष्ट व्यक्ति आये थे जिन्होनें विषय पर सार गर्भित चर्चा की । इस नामिका में निम्न व्यक्ति थे :

  • श्री गिब्सन जी वेद मनी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, रिटेलर असोसिएशन ऑफ    इंडिया  ।
  • श्री पिनाकी रंजन मिश्रा, ई एण्ड वाई कंसल्टेंसी ।
  • श्री निमिश शाह, उपाध्यक्ष, आर पी जी रिटेल ।

नामिका के प्रत्येक व्यक्ति द्वारा विषय पर १५ मिनट की प्रस्तुति से कार्यवाहियॉ शुरु हुइंर् । इन प्रस्तुतियों में रिटेल उद्योग के संपूर्ण कार्यप्रणाली और अन्य छोटी-छोटी बातों को रेखांकित किया गया । उन्होनें उस गति पर बल दिया जिस पर रिटेल उद्योग विकसित हुआ है, भारतीय बाजार में हो चुके अद्यतन परिवर्तनों एवं इसकी भावी संभावनाओं पर बल दिया गया । श्री गिब्सन जी वेद मनी, परिचर्चा के मॉडरेटर ने डेस्टिनेशन रिटेली, फ्रैचाइज रुट के माध्यम से बहु राष्ट्रीय कंपनियों का प्रवेश, कपड़ो के स्वरुप में विशिष्टता की बृद्धि जैसे संगठित रिटेल में होने वाली विभिन्न क्रांतीयों के बारे में हमें संक्षेप में बताते हुए एक सारगर्भित परिचर्चा की आधारशीला रखा । वक्तओं ने कैश एण्ड कैरी, हाईपर मार्केट, डिपार्टमेंटल स्टोर, सिंगल मार्केट, सुपर मार्केट, सुविधाजनक स्टोर, एक मूल्य के सामान जैसे मुख्य रिटेल खाके के ज्ञान के साथ श्रोताओं को मंत्र मुक्त कर दिया उन्होनें भारत में संगठित रिटेल के प्रमुख खिलाड़ियों जैसे- पैंटलून, शापर्स स्टॉप, आर पी जी, पिरामिड आदि और भारतीय बाजार में उनके कब्जे के बारे में भी श्रोताओं को सूचित किया ।

इस समीक्षा में पिछली समीक्षा की परंपरा को बरकार रखते हुए कॉर्पोरेट वर्ल्ड एवं प्रबंधन विद्यार्थियों के बीच बहुत अधिक संवाद स्थापित किया गया । परिचर्चा से यह उभर कर आया कि रिटेल उद्योग व्यष्टियों एवं रिटेल दोनों के लिए बृद्धि एवं विकास के अवसर उपलब्ध कराया ।